Monday, September 24, 2018

'चिंगारी' सुलगाने वाली कल्पना हुईं ख़ामोश

मशहूर फ़िल्ममेकर कल्पना लाज़मी का निधन हो गया है.
मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में उन्होंने आख़िरी सांस ली. रविवार सुबह क़रीब साढ़े चार बजे उनका निधन हुआ. वो लंबे समय से किडनी की समस्या से जूझ रही थीं.
बीते सप्ताह मंगलवार को उन्हें मुंबई के कोकिकलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनका अंतिम संस्कार रविवार को (आज) ओशीवारा में होगा.
कल्पना के भाई देव लाज़मी ने पीटीआई को बताया कि कल्पना को डायलिसिस पर रखा गया था. वो बीते तीन सालों से अस्पतालों के चक्कर लगा रही थीं.
रूदाली, दरमियां और दमन जैसी फ़िल्मों का सफल निर्देशन करने वाली कल्पना ने साल 2006 में अपनी आख़िरी फ़िल्म चिंगारी का निर्देशन किया था.
इस फ़िल्म में मिथुन चक्रवर्ती, सुष्मिता सेन ने मुख्य भूमिका निभाई थी.
मशहूर चित्रकार ललिता लाज़मी की बेटी कल्पना ने फ़िल्मकार श्याम बेनेगल के असिस्टेंट के तौर पर करियर की शुरुआत की थी.
उनके निधन पर बॉलीवुड के तमाम सितारों ने दुख ज़ाहिर किया है.
"इस ख़बर को सुनकर मैं बहुत दुखी हूं. आज सुबह क़रीब साढ़े चार बजे कल्पना जी का निधन हो गया. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे."
हंसल मेहता ने शोक जताते हुए लिखा है..
"मुझे अभी अभी पता चला कि कल्पना हमारे बीच नहीं रहीं. जब वो दरमियां बना रही थीं तब मैंने उनके साथ बतौर एडिटर काम किया था. उन्हें हमेशा एक बेबाक़ और साहसी महिला के तौर पर याद किया जाएगा. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे."
रवीना टंडन ने कल्पना के साथ की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा है...
"आप हमें बहुत याद आएंगी कल्पना जी. ये आपके जाने का समय नहीं था पर ईश्वर करे कि आपको शांति मिले. दमन की शूटिंग के दौरान के ये पल अमानत हैं..."
इंसान के सबसे वफ़ादार दोस्त कहे जाने वाले कुत्तों के बारे में आप कितनी बातें जानते हैं?
प्राणी शास्त्री और मानवविज्ञानी जॉन ब्रैडशॉ इंसानों और जानवरों के बीच के संपर्क और आपसी व्यवहार का अध्यायन करते हैं.
'इन डिफ़ेंस ऑफ़ डॉग्स' और 'एनिमल्स अमंग अस' किताबों के लेखक जॉन ब्रैडशॉ ने कुत्तों के अब तक के इतिहास का भी गहरा अध्ययन किया है.
उन्हीं से जानिए इंसान के पक्के और प्यारे से दोस्त से जुड़ीं 10 ऐसी बातें, जिनके बारे में शायद आपको पता न हो:
अमरीका और यूरोप में आज जो भेड़िए पाए जाते हैं, वे कुत्तों के दूर से रिश्तेदार हैं. इन भेड़ियों का डीएनए कुत्तों के डीएनए से 99 प्रतिशत मेल खाता है.
कुत्तों के कई आकार और कई सारी नस्लें हैं. इतनी नस्लें किसी भी जंगली या पातलू जानवर की नहीं हैं. इसके लिए भी इंसान ज़िम्मेदार है.
हालांकि, कुत्तों की शारीरिक विविधता की भी एक सीमा है.
सबसे छोटे आकार के चिवावा से लेकर सबसे बड़े कुत्ते ग्रेट डेन की शारीरिक संरचना उसी ढांचे पर बनी है, जैसी उनके पुरखे भेड़ियों की थी. भले ही सभी के आकार और नस्लें भिन्न हों मगर समानताएं भी काफ़ी हैं.
कुत्तों में कमाल की सूंघने की क्षमता जेकबसन या वोमेरोनेज़ल नाम के अंग के काऱण होती है जो इनके नथुनों और मुंह के ऊपरी हिस्से पर होता है.
वैज्ञानिकों को अभी तक पता नहीं चल पाया है कि इनमें यह अंग क्यों होता है. मगर बिल्लियों और अन्य जानवरों पर किए गए अध्ययन बताते हैं कि शायद यह क्षमता उनके पास इसलिए है ताकि वे अन्य कुत्तों द्वारा छोड़े गए संकतों को पहचान सकें.
कभी आपके मन में ख्याल आया है कि कुत्तों को दिखता कैसा है?
कुत्ते हरे, पीले और नीले रंग में तो हमारी तरह ही फ़र्क कर सकते हैं मगर उनकी आंखें लाल रंग को नहीं पकड़ पातीं.
कुत्तों को लाल रंग गहरा स्लेटी नज़र आता है.
कुत्ते मुस्कुराते हैं मगर उन कारणों से नहीं जिनके चलते हम इंसान मुस्कुराते हैं.
प्राणी विज्ञानी जॉन ब्रैडशॉ बताते हैं कि कुत्ता अपने मालिक से थोड़ा प्यार पाने के लिए मुस्कुराता है.
इसलिए ज़रूरी नहीं कि वे मुस्कुरा रहे हों तो हम समझें कि वे खुश हैं. ये एक संकेत हो सकता है कि वे थोड़े बेचैन हैं और आपसे थोड़ा दिलासा या हिम्मत चाहते हैं.
तो जब कभी आपको अपना डॉगी मुस्कुराता नज़र आए तो उसे दुलारना न भूलें.
कुत्तों को यह अहसास नहीं होता कि उन्होंने कुछ ग़लत कर दिया है. हालांकि हमें ऐसा लग सकता है, जब वे शर्मिंदा होने जैसा चेहरा बनाते हैं.
बहुत सारे लोग बताते हैं कि कैसे उनका कुत्ता 'गिल्टी लुक' देता है. मगर विज्ञान बताता है कि कुत्ते उस समय सामने खड़े आदमी की बॉडी लैंग्वेज के आधार पर ऐसी प्रतिक्रिया देते हैं.
अपराध बोध दरअसल एक पेचीदा भाव होता है जिसे कुत्ते नहीं समझ सकते. ऐसे में कुत्ते गिल्टी लुक देते समय दरअसल इस बात को लेकर डरे हुए होते हैं कि उन्हें सज़ा मिल सकती है. मगर उन्हें यह पता नहीं होता कि उन्होंने कुछ ग़लत किया है.
जब एक बार पिल्ले को यह पता चल जाता है कि इंसानों का स्वभाव दोस्ताना होता है, उसका स्वाभाविक ज्ञान उसे बताता है कि इस व्यक्ति के साथ रहने में ही उसके जीवित रहने की ज्यादा संभावनाए हैं.
यही कारण है कि कई कुत्ते तब परेशान हो जाते हैं जब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है. वे दूर की नहीं सोच पाते और उन्हें ऐसा लग सकता है कि मालिक ने उन्हें हमेशा के लिए छोड़ दिया है.
नैशनल जियोग्राफ़िक के अनुसार इंसानों के साथ रहने के कारण कुत्तों में विलियम्स सिंड्रोम जैसा ही एक सिंड्रोम पैदा हो जाता है.
अगर इंसानों में  और  नाम के जीन्स न हों तो उन्हें विलियम्स सिंड्रोम हो जाता है. यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें लोगों को समझने में मुश्किल आती है और उन्हें 'पूरी दुनिया को प्यार करने की आदत' पड़ जाती है.
अगर कुत्तों में देखें तो उनके GTF2I और  नाम के जीन्स अलग होते हैं. इसी कारण वे इंसानों के संपर्क में आकर ज़्यादा दोस्ताना हो जाते हैं.