Wednesday, November 14, 2018

फेसबुक से लाखों कमाएंगी ये पाकिस्तानी महिलाएँ

हमने शहीद ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में युवा महिलाओं से रूबरू होने की योजना बनाई.
हमारे इस आयोजन में तकरीबन पचास युवा महिलाओं ने हिस्सा लिया. इस दौरान इन्होंने समाज में टैबू यानी वर्जित माने-जाने वाले महिला स्वास्थ्य, प्रजनन के
महिलाओं में मासिक धर्म कुछ इस तरह का मुद्दा है कि शहरों में रहने वाली पढ़ी-लिखी महिलाएं भी इन मुद्दों पर बात करने से हिचकती हैं. लेकिन जब बीबीसी शी के इस इवेंट के दौरान एक युवा छात्रा ने इस मुद्दे को उठाया तो मैं हैरान रह गई.
ये लड़की कहती है कि सिंध प्रांत में हज़ारों महिलाएं चुप्पी के साथ ये सब बर्दाश्त कर रही हैं, वे साफ़ सेनिटरी उत्पाद नहीं खरीद सकती हैं, किसी तरह की समस्या पैदा होने पर वे डॉक्टरी मदद नहीं ले सकती हैं, सिंध प्रांत के अंदरूनी इलाक़ों में वे अपने हारमोनल डिसऑर्डर और स्तन कैंसर जैसी बीमारियों के बारे में बात करने से भी हिचकती हैं.
यही लड़की उदाहरण देकर समझाती है कि अगर कोई अविवाहित लड़की महिला रोग विशेषज्ञ के पास जाती है तो समाज उसका जीना मुश्किल कर देता है.
वहीं, एक दूसरी लड़की कहती है कि अगर कोई लड़की इस बारे में बात करे तो उनके परिवार वाले उन्हें जबरन चुप करा देते हैं.
यह लड़की अपने अनुभव को साझा करते हुए कहती है, "हमें ये बताया जाता है कि हम बेशरम हैं. ऐसी बातों पर चर्चा करना हमारे धर्म और तौर-तरीक़ों के ख़िलाफ़ है."
सिंध प्रांत के कांडकोट इलाक़े से आने वाली एक लड़की कहती है कि महिलाओं का उनके मन और शरीर पर किसी तरह का अधिकार नहीं है. उन्हें कम उम्र में शादी करके बच्चे पैदा करने के लिए विवश किया जाता है. इसके बाद अगर वह एक लड़के को जन्म नहीं देती हैं तो उनके पति उन्हें छोड़कर दूसरी शादी कर लेते हैं.
कांडकोट से आने वाली यह लड़की बताती है, "गर्भ धारण के दौरान अगर पति को ये पता चल जाए कि वो एक लड़की को जन्म देने वाली है तो उसका पति उसे छोड़ देता है, उसे ज़रूरत के हिसाब से खाना और डॉक्टरी मदद नहीं दी जाती है."
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट 'टर्निंग प्रोमिसेज़ इनटू एक्शन: जेंडर इक्वैलिटी इन द 2030 एजेंडा' इन दावों की पुष्टि करते हुए बताती है कि सिंध प्रांत में महिलाओं की एक बड़ी संख्या कुपोषण की शिकार है.
यह रिपोर्ट बताती है कि कुपोषण के लिहाज़ से सिंध प्रांत के ग़रीब घरों की महिलाओं की हालत पूरे पाकिस्तान के किसी और समाज से बदतर है.
हमारे इवेंट में हिस्सा लेने आई एक लड़की बताती है कि महिलाओं की ख़राब शारीरिक और मानसिक हालत समाज पर एक बुरा असर डाल रही है. अगर आप प्रसव के दौरान महिलाओं और नवजातों की मौत के आंकड़ों पर नज़र डालेंगे तो आप हैरान रह जाएंगे.
महिलाओं ने हमें उस तनाव के बारे में बताया जिसका सामना यहां की महिलाएं करती हैं.
एक लड़की बताती है कि पुरुष अपने काम के दौरान जिन चुनौतियों का सामना करते हैं, उसकी हताशा महिलाओं पर निकालते हैं.
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समाज से आने वाली एक लड़की कहती है कि सिंध प्रांत में मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए विवश करते हैं.
वह बताती है कि हिंदू समाज इन वजहों के चलते अपनी लड़कियों को आगे पढ़ने नहीं देते.
वह कहती हैं, "हम भी पाकिस्तानी हैं और सिंधी समाज में अच्छे ढंग से रचे-बसे हैं. ऐसे में जबरन धर्म परिवर्तन बंद होने चाहिए. हमें इस मुद्दे की वजह से अपने सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए."
इस आयोजन में शामिल हुई कुछ लड़कियों ने मुख्यधारा की मीडिया से ये अपेक्षा जताई कि उसे बाल शोषण को लेकर बात करनी चाहिए. इसके साथ ही महिलाओं को उनकी शारीरिक सुरक्षा को लेकर शिक्षित करना चाहिए, यौन शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए क्योंकि इससे बच्चों के यौन शोषण पर लगाम लगेगी.
यह लड़की कहती है, "मीडिया को बच्चों को गुड और बैड टच के बारे में शिक्षा देनी चाहिए."
अधिकार, और मानसिक सेहत जैसे मुद्दों पर बात की.

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